शराब ठेकों से राजस्व बढ़ाने बदलेगी आबकारी नीति….

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Two whiskeys and a bottle

आबकारी आयुक्त ने सभी जिलों के सहायक आयुक्त और डीईओ से मांगे सुझाव
प्रदेश टुडे संवाददाता, ग्वालियर

प्रदेश की नई आबकारी नीति का मसौदा तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। आबकारी महकमे के आला अफसर नई नीति पर सलाह-मशविरा करने में जुटे हैं। विभागीय स्तर पर बैठकों का दौर चल रहा है। अफसरों का पूरा जोर इस बात पर है कि पुरानी नीति में बदलाव कर नए वित्तीय वर्ष के लिए ऐसे क्या प्रावधान किए जाएं,इससे राजस्व को बढ़ाया जा सके। इस संबंध में आबकारी आयुक्त ने सभी जिलों के अधीनस्थ अधिकारियों के सुझाव मांगे हैं।
पछले कुछ वर्षों से लाइसेंस फीस में बीस फीसदी वृद्धि कर शराब दुकानों का निष्पादन रिनुअल के जरिए किया जा रहा था,जिसमें इस साल ठेकेदारों ने बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं ली।  तीन जिलों को छोड़कर बाकी में ठेकों का रिनुअल नहीं कराया गया। बाद में कई चरण में टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई,तब जाकर तमाम ठेके निर्धारित लाइसेंस फीस से चालीस फीसदी तक कम में देना पड़े। इसके चलते टारगेट पूरा नहीं हो सका। शराब ठेकों से बीस फीसदी अधिक राजस्व कमाने की उम्मीद थी,लेकिन इससे नौ फीसदी राजस्व कम मिला।  ऐसे में नए वित्तीय वर्ष 2017-18 में शराब ठेकों से राजस्व बढ़ाना चुनौती से कम नहीं है।
बावजूद इसके आबकारी अफसर इस प्रयास में जुटे हैं कि नई नीति में ऐसा कुछ किया जाए,जिससे राजस्व में दस से 20 फीसदी तक इजाफा हो जाए। बता दें कि नई नीति को लेकर आबकारी आयुक्त अरुण कोचर इसी माह अधीनस्थ अधिकारियों (संभागीय आबकारी उपायुक्त, सहायक आबकारी आयुक्त,जिला आबकारी अधिकारी) की बैठक ले चुके हैं। सलाह-मशविरा करने ठेकेदारों और डिस्टलरीज के संचालकों की बैठक भी शीघ्र ही ली जाएगी।

टेंडर,लॉटरी या फिर से रिनुअल
नए वित्तीय वर्ष में शराब ठेकों का निष्पादन टेंडर के जरिए किया जाए या लॉटरी निकाली जाएं इस पर भी विचार चल रहा है। वहीं कुछ अफसर यह भी राय दे रहे हैं कि लाइसेंस फीस घटाकर ठेकों का रिनुअल कराने का अवसर ठेकेदारों को दिया जाए। जो ठेकेदार रिनुअल नहीं कराएं तो बाद में टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

इनका कहना है
नई आबकारी नीति का खाका तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हमारा पूरा फोकस राजस्व बढ़ाने पर है। इसके लिए सभी जिलों के आबकारी अधिकारियों से सुझाव मांगे हैं।
अरूण कोचर, आबकारी आयुक्त,मप्र

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